सपनों में सुन्दर प्रिय का,
निर्मम रूप संवारे,
गए वहीं हर बार जहां हम,
जीती बाज़ी हारे । ( 1954 )
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सोते से मत मुझे जगाओ,
पीड़ा होती जगने में,
जाग्रति से नींद भली है,
प्रिय आते हैं सपने में । ( 1955)
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मत पूछो किसने तोड़ा,
मेरे मधु का प्याला ,
अनजाने में मैंने ही,
कुछ ऐसा है कर डाला । (1955 )
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न जाने लोग कैसे फरेब इख्तियार करते हैं ,
कहीं यक़ीं, कहीं प्यार का व्यापार करतें हैं।
उनके हुसनो अदा का भरम उलझाता ऐसा है ,
वह गुमराह करतें हैं, हम ऐतबार करते हैं। ( मई 2017 )
निर्मम रूप संवारे,
गए वहीं हर बार जहां हम,
जीती बाज़ी हारे । ( 1954 )
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सोते से मत मुझे जगाओ,
पीड़ा होती जगने में,
जाग्रति से नींद भली है,
प्रिय आते हैं सपने में । ( 1955)
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मत पूछो किसने तोड़ा,
मेरे मधु का प्याला ,
अनजाने में मैंने ही,
कुछ ऐसा है कर डाला । (1955 )
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न जाने लोग कैसे फरेब इख्तियार करते हैं ,
कहीं यक़ीं, कहीं प्यार का व्यापार करतें हैं।
उनके हुसनो अदा का भरम उलझाता ऐसा है ,
वह गुमराह करतें हैं, हम ऐतबार करते हैं। ( मई 2017 )